ए ज़िन्दगी, चल आज सलाम करते है हर उस नारी को ,
जिसने अपने सपनो को उड़ान दी ।
एक अदब के साथ काटती रही हर परेशानी को,
दिल में भले ही कसक लिए रहती हो , पर होंठों पे मुस्कान को सजाये हुए ।
आँखों में हज़ारो सपने संजोए हुए , सबको साथ लिए उड़ान भर्ती है ।
चलो आज सलाम करे हर उस नारी को जो आज भी अंधेरों में दीए की रोशनी बनके सजती है ।
कभी बेटी, कभी पत्नी, कभी माँ
कभी बहन, कभी बहू , कभी हमनवा
अनगिनत रिश्तों में नपी, अनगिनत रिश्तों में सजी
और कभी सिर्फ़ एक नारी जो अपनी पहचान ढूँढती रही
ना जाने कितनों की ज़िंदगी के उस अटूट, स्थिर टुकड़े की तरह जो पहेली के हर पहलू को सजाये रही ,
दिल से शुक्रिया करते है हर उस नारी को ,
जो सब टुकड़ों में इक्कठा एक खूबसूरत चित्र बनाये रही ।
ना कोई आँधी से रुकी, ना किसी चट्टान से डरी ,
उस दरिया को पार करने की हिम्मत लिए ,
नवजीवन को जन्म देने वाली जननी है ।
क्या बराबरी करने की होड़ में लग गई उस खंड से,
जिससे आज भी पैदा करने का दम रखती है ।।
तू पहले भी शक्ति थी , तू आज भी शक्ति है
तू समृद्धि है , तू ही भक्ति है ,
तू ही संपत्ति, तू ही सद्बुद्धि, तू ही विद्यावर्दिनी है ,
ना जाने कितनी ज़िंदगियों का तू ही मोती है ।
ए नारी, तेरी खूबसूरती पर क्या जिक्र करे एक दिन
तू तो हर दिन सजाने का हुनर रखती है,
तू तो हर दिन सजाने का हुनर रखती है ।।
-नेहा काम्बोज गौड़
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