Friday, 20 February 2026

अकेलेपन से इश्क़

ज़्यादा दिन अकेला ना छोड़ा करे जनाब

इस अकेलेपन की आदत कुछ इश्क़ में बदल जाती है 

और ख़ुद के साथ वक्त बिता के एहसास होता है,

हर उस लम्हे का जो दूसरो पे ज़ाया किया 

काश, उतना प्यार तब ख़ुद से किया होता 

दुनिया देखती है तो बोलती है "अकेली है "

भीड़ से दूर हूँ ,पर ख़ुद के बहुत क़रीब 

साफ़ भाषा में बोलें तो अकेले हूँ , पर तन्हा नहीं 


इस अकेलेपन से इश्क़ करके को देखें साहब 

ख़ुद से गुफ़्तगू करके तो देखें बेहिसाब 

ज़िंदगी में दोबारा धोखा नहीं खाएँगे

दोबारा भीड़ में ख़ुद को नहीं पाएँगे 

किसी रोशनी की तलाश में बाहर नहीं जाएँगे

क्यूँकि ख़ुद के अंदर सूर्य का तेज पाएंगे


इस अकेलेपन से इश्क़ करके तो देखें जनाब

क्या पता आप भी मेरी तरह कवि बन जाएँगे ।।


-नेहा काम्बोज गौड़

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